Thursday, January 24, 2019

18 साल तक 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस नहीं, मनता रहा 'स्वतंत्रता दिवस', जानें वजह

26 जनवरी को देशभर में 69वां गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा. इसी दिन हमारे देश का संविधान लागू किया गया था. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि 26 जनवरी को मनाए जाने वाले गणतंत्र दिवस को 'स्वतंत्रता दिवस' के रूप में मनाया जाता था. आइए जानते हैं क्या है पूरी कहानी...

भारत को आजादी भले ही 15 अगस्त 1947 को मिली लेकिन 26 जनवरी 1950 को भारत पूर्ण गणराज्य बना. इसी दिन को पूरा भारत गणतंत्र दिवस के रूप में मनाता है. संविधान 26 नवंबर 1949 में पूरी तरह तैयार हो चुका था लेकिन दो महीने इंतजार करने के बाद इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया था.

संविधान लागू करने के लिए 26 जनवरी की तारीख को इसलिए चुना गया क्योंकि साल 1930 में 26 जनवरी को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 'पूर्ण स्वराज' का ऐलान किया था.

भारत के गणतंत्र की यात्रा कई सालों पुरानी है, जो 1930 में शुरू हुई थी. जिसके बाद सन 1930 से 15 अगस्त 1947 तक पूर्ण स्वराज दिवस यानी 26 जनवरी को ही स्वतत्रंता दिवस मनाया जाता था.

जब गणतांत्रिक राष्ट्र का हुआ ऐलान

गणतंत्र राष्‍ट्र के बारे में 31 दिसंबर 1929 को रात में भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस के लाहौर सत्र में विचार किया गया था. जिसके लिए एक बैठक आयोजित की गई थी. यह बैठक पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्‍यक्षता में आयोजि‍त की गई थी.

इसी बैठक में हिस्सा लेने वाले लोगों ने पहले 26 जनवरी को "स्‍वतंत्रता दिवस" के रूप में मनाने की शपथ ली थी, जिससे कि ब्रिटिश राज से पूर्ण स्‍वतंत्रता के सपने को साकार किया जा सके.

इसके बाद लाहौर सत्र में नागरिक अवज्ञा आंदोलन की रूपरेखा तैयार हुई और यह फैसला लिया गया कि 26 जनवरी 1930 को 'पूर्ण स्‍वराज दिवस' के रूप में मनाया जाएगा. वहीं इसी दिन देश का झंडा फहराया गया और 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस मनाने की शपथ ली गई थी. इसके लिए सभी क्रांतिकारियों और पार्टियों ने एकजुटता दिखाई थी.

डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद ने की 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाने की घोषणा

जहां भारत देश अंग्रेजों की गुलामी से 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया था. लेकिन जब 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान अस्तित्व में आया तब भारत को अपनी ताकत का अहसास हुआ. देश का संविधान 2 साल, 11 महीने और 17 दिन में तैयार किया गया था. ये कहना गलत नहीं होगा कि सही मायने में भारत को आजादी 26 जनवरी को ही मिली थी. जिसके बाद देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 26 जनवरी को देशभर में गणतंत्र दिवस मनाने की घोषणा की.

Thursday, January 17, 2019

डॉक्टरों पर इनकम टैक्स विभाग के छापों से यूपी में मचा हड़कंप

यूपी में रसूखदार और मशहूर डॉक्टरों के ठ‍िकानों पर इनकम टैक्स ड‍ि‍पार्टमेंट की रेड पड़ी है. इस रेड से पूरे उत्तर प्रदेश में हड़कंप मच गया है. बताया जा रहा है क‍ि यूपी में इस तरह से एक साथ डॉक्टरों पर छापेमारी का ये पहला मामला है.

उत्तर प्रदेश के कई शहरों में आयकर विभाग की छापेमारी आज सुबह 8 बजे से चल रही है. आयकर विभाग की टीमें इन जगहों पर दस्तावेजों को खंगाल रही हैं. खातों में हेराफेरी, बेनामी रसीदें, हिसाब-किताब में गड़बड़ी की बात सामने आने पर छापेमारी की ये कार्रवाई की गई है.

लखनऊ, कानपुर के बड़े अस्पतालों में छापा मारा गया है. लखनऊ, कानपुर, मेरठ, नोएडा, मुरादाबाद, हापुड़ सहित अन्य शहरों में  भी आयकर विभाग की टीम के होने की सूचना म‍िल रही है. कानपुर के एसपीएम , लखनऊ के चरक अस्पताल में रेड पड़ी है.

लखनऊ के चरक अस्पताल में डॉक्टर रतन सिंह के ठिकानों पर एक साथ छापा पड़ा है. वहीं, कानपुर में एसपीएम हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर पर छापेमारी की गई है. डॉक्टर महेशचंद्र शर्मा के कानपुर और लखनऊ के ठिकानों पर छापेमारी की गई है. मुरादाबाद के मशहूर डॉक्टर पीके खन्ना के आवास पर भी आईटी की रेड पड़ी है.

मेरठ के मशहूर डॉक्टर न्यूरो फिजिशियन भूपेंद्र चौधरी के घर छापा पड़ा है. वहीं, नोएडा में नियो अस्पताल के डॉक्टर राजीव मोतियानी और गुलाब गुप्ता के घर दब‍िश दी गई है. हापुड़ के जीएस मेडिकल कॉलेज में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई है. इसी अस्पताल के डॉक्टर अंकित शर्मा के घर छापेमारी की गई है.

इससे पहले  कानपुर में 30 नवंबर को दो डॉक्टर भाइयों के घरों और अस्पतालों में आयकर विभाग ने छापे मारे थे. छापों में दोनों ही आवासों से आयकर विभाग को बंद हो चुकी करंसी म‍िली थी. मामले में आयकर विभाग ने दोनों प्रकरण में केस  दर्ज किया था. इसी छापे से जोड़ते हुए एक अन्य रियल एस्टेट कारोबारी के यहां भी छापा मारा गया था.

भारत की शूटिंग के बाद सुनील क्या करेंगे?
सुनील ग्रोवर ने सोशल मीडिया पर ऐलान कर दिया है कि 40 दिनों के लिए वो सलमान की फिल्म भारत की शूटिंग में व्यस्त हैं. लेकिन इसके बाद वो किस प्रोजेक्ट में काम करेंगे ये सवाल बना है. पहले माना गया था कि कानपुर वाले खुरानाज शो से ब्रेक लेकर सुनील फिर इसी पर वापस आएंगे. लेकिन शो के बंद होने का ऐलान खुद कॉमेडियन ने ही किया है. ऐसे में उनके कपिल के साथ आ जाने की बात मानने के पर्याप्त बहाने और मौके हैं.

कपिल का शो टॉप पर है. शो के प्रोड्यूसर सलमान चाहेंगे ही कि ये टॉप पर बना रहे. पिछले दिनों आजतक से बातचीत में सुनील ने भी संकेत दिया कि भविष्य में अगर मौका मिला तो वे कपिल के साथ जरूर काम करेंगे. यानी भारत के बाद सुनील के लिए ये "मौका" दि कपिल शर्मा शो ही हो सकता है. भला सुनील, सलमान भाईजान को ना थोड़े कहेंगे. तो ये मानकर चला जा सकता है कि कपिल के शो में सुनील की वापसी हो सकती है. ऐसा हुआ तो कॉमेडी पसंद करने वालों के लिए ये किसी तोहफे से कम नहीं है.

Tuesday, January 1, 2019

Kader Khan Passes Away: 81 साल की उम्र में एक्टर का निधन, भारी पड़ा नए साल का पहला दिन

नए साल का पहला ही दिन बॉलीवुड के लिए बेहद खराब रहा. दिग्गज एक्टर-राइटर-निर्देशक कादर खान का 81 की उम्र में निधन हो गया है. उनके बेटे सरफराज खान ने निधन के खबर की पुष्टि की है. कनाडा के एक अस्पताल में कादर खान ने अंतिम सांस ली. मौत की खबर से बॉलीवुड सदमे में है.

एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान शक्ति कपूर का गला भर आया. उन्होंने कहा, अब कादर खान जैसा कोई नहीं होगा.

हाल ही में कादर खान की बीमारी के बाद मौत की अफवाह भी उड़ी थी. बाद में उनके बेटे सरफराज ने कहा था, "ये बातें फर्जी हैं और सिर्फ अफवाह भर हैं, मेरे पिता अस्पताल में हैं."  कादर खान को सांस लेने में तकलीफ है. डॉक्टर्स ने उन्हें रेगुलर वेंटीलेटर से हटाकर BiPAP वेंटिलेटर पर रखा गया था.

कनाडा में कादर खान का इलाज चल रहा था. उनकी सलामती के लिए अमिताभ बच्चन ने भी ट्वीट किया था. लेकिन लोगों को हंसाने वाला अभिनेता अब नहीं रहा. अमिताभ ने कादर खान के साथ दो और दो पांच, मुकद्दर का सिकंदर, मि. नटवरलाल, सुहाग, कूली और शहंशाह में काम किया है.

हरफनमौला थे कादर खान

कादर खान हरफनमौला कलाकार थे. उनकी और गोविंदा की जोड़ी को परदे पर काफी पसंद किया गया. इनमें दरिया दिल, राजा बाबू, कुली नंबर 1, छोटे सरकार, आंखें, तेरी पायल मेरे गीत, आंटी नंबर 1, हीरो नंबर 1, राजाजी, नसीब, दीवाना मैं दीवाना, दूल्हे राजा, अखियों से गोली मारे आदि फिल्में कीं.

वैसे कादर खान ने खलनायक और तमाम चरित्र भूमिकाएं भी कीं. उन्होंने कई फिल्मों का निर्देशन भी किया. उन्होंने कई फिल्मों के मशहूर संवाद भी लिखे. पिछले कुछ समय से अस्वस्थता के चलते उन्होंने फिल्मों से पूरी तरह दूरी बना ली थी.

चुनावी वादे: बीते 4 साल के दौरान देश में चुनावी वादों के अच्छे दिनों की दरकार रही है. इन अच्छे दिनों के लिए देश में उत्पाद और सेवाओं की कम कीमत के साथ-साथ आम आदमी के लिए मूलभूत सुविधाओं पर जोर रहा है. बेहतर सड़क, पर्याप्त बिजली, मजबूत और सुरक्षित जन-यातायात, स्वास्थ सुविधा, प्रभावी शिक्षा व्यवस्था चुनावी वादों के जरिए सरकार के दायित्व में शामिल है. इन वादों को पूरा करने के लिए बेहद जरूरी है कि केन्द्र सरकार के राजस्व में इजाफा होता रहे और वह तभी संभव है जब देश में रोजगार के बड़े अवसर पैदा हों. इनके अलावा आगामी चुनावों से पहले देश की शीर्ष राजनीतिक दल लोकलुभावन वादों की बारिश कर रहे हैं जिनका महज नकारात्मक असर देश के विकास की गाथा पर पड़ेगा.

ये हैं आर्थिक आंकड़े जिनका 2019 चुनावों से पहले सरकार के पक्ष में होना जरूरी है 

वैश्विक संकट: भारत में तेज विकास दर ऐसी स्थिति में है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था सिकुड़न के दौर में है. दुनिया की ज्यादातर बड़ी अर्थव्यवस्थाएं गंभीर चुनौतियों से घिरी है. अमेरिका और चीन के बीच शुरू हुए ट्रेड वॉर का असर दोनों अर्थव्यवस्थाओं के साथ-साथ यूरोप और एशिया की अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है. 2019 के दौरान ट्रेड वॉर और गंभीर चुनौती खड़ा कर सकता है जिसका खामियाजा भारत समेत कई एशियाई देशों को भुगतना पड़ेगा. इसके अलावा वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है. जहां 2018 में कच्चे तेल की कीमत में एक बार फिर इजाफा शुरू हुआ वहीं कच्चे तेल के उत्पादक खाड़ी देश 2014 से 2017 तक कमजोर कीमत के चलते कड़ी चुनौतियों में घिरे हैं. लिहाजा, 2019 के दौरान भारत के विकास की कहानी के लिए बेहद जरूरी है कि कच्चा तेल सामान्य दर पर उपलब्ध रहे जिससे सरकार के राजस्व पर अतिरिक्त बोझ न पड़े.