बीबीसी को जानकारी मिली है कि भारतीय वायु सेना ने जैश-ए-मोहम्मद के जिस कैंप को निशाना बनाया वो ख़ैबर-पख़्तूनख़्वाह प्रांत में है ना कि नियंत्रण रेखा के नज़दीक.
आधिकारिक सूत्रों ने बीबीसी को बताया है कि "लड़ाकू मिराज 2000 विमानों ने ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत में जंगल में बने जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग कैंप पर हमला किया है".
पहले इस बात को लेकर भ्रम था कि हमला पुंछ के नज़दीक बालाकोट नाम की जगह पर हुआ है, या फिर ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत में हुआ है.
अब आधिकारिक सूत्रों ने बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद को बताया है कि जिस बालाकोट पर हमला किया गया है वह पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के आगे ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत का हिस्सा है जो मानशेरा ज़िले में है.
हालांकि भारत ने आधिकारिक तौर पर यह साफ़ नहीं किया है कि मिराज विमानों ने किस बालाकोट को निशाना बनाया है.
भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, "इस कार्रवाई में बहुत बड़ी संख्या में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी, ट्रेनर, सीनियर कमांडर और जिहादियों के समूह मारे गए हैं, ये लोग भारत पर फ़िदायीन हमले करने की तैयारी कर रहे थे. बालाकोट का ठिकाना मौलाना यूसुफ़ अज़हर चला रहा था जिसे उस्ताद ग़ौरी के नाम से भी जाना जाता था, वह मसूद अज़हर का साला है."
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने सुबह 09:59 बजे ट्वीट करके कहा था कि भारतीय लड़ाकू विमानों ने नियंत्रण रेखा के पार मुज़फ़्फ़राबाद सेक्टर में हमले किए हैं. इसके बाद से अब तक पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है.
पाकिस्तान में बीबीसी के संवाददाता इलियास ख़ान ने बताया है कि बालाकोट मानशेरा ज़िले का हिस्सा है. भारतीय विमानों ने जिस जगह बम गिराए हैं उसका नाम जाबा टॉप है, जो एक पहाड़ी चोटी है. हिज़्बुल मुजाहिदीन जाबा में ट्रेनिंग कैंप चलाता रहा है.
पाकिस्तान ने इस इलाक़े की फ़ौरन घेराबंदी कर दी है, जाबा, गढ़ी हबीबुल्लाह और बालाकोट इलाक़ों के लोगों ने बीबीसी उर्दू के पत्रकार ज़ुबैर ख़ान को बताया कि सुबह के तीन से चार बजे के बीच उन्होंने ज़ोरदार धमाकों की आवाज़ें सुनीं. मारे जाने वाले लोगों की तादाद के बारे में अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है.
बालाकोट के आसपास के पुलिस अधिकारियों ने अपना नाम न छापने की शर्त पर कहा कि उन्होंने धमाके की जगह पर जाने की कोशिश की लेकिन सुरक्षा बलों ने उस इलाक़े को अपनी निगरानी में ले लिया है.
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़ भारतीय वायु सेना के हमले काफ़ी ख़ौफनाक थे, जिससे सोए लोगों की नींद टूट गई.
जाबा टॉप बालाकोट निवासी मोहम्मद आदिल ने बीबीसी को बताया कि धमाके इतने तेज़ थे कि जैसे कोई ज़लज़ला आ गया हो.
उन्होंने कहा, "सुबह तीन बजे का टाइम था, आई. ऐसा लगा ज़लज़ला आया हो. हम रातभर नहीं सोए. पांच-दस मिनट बाद हमें पता चला कि धमाका हुआ है."
आदिल ने बताया कि पांच धमाके एक ही समय हुए और कई ज़ख़्मी हो गए. फिर कुछ देर बाद आवाज़ आनी बंद हो गई.
"सुबह हम देखने उस जगह गए जहां धमाके हुए थे, वहां बड़े गड्ढे हो गए थे. कई मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए थे. एक व्यक्ति ज़ख़्मी भी दिखा."
भारत सरकार के विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया है कि इस हमले में विशेष तौर पर केवल जैश के शिविर को निशाना बनाया गया और विशेष ध्यान रखा गया कि आम लोग इसकी चपेट में ना आएँ.
ये कैंप घने जंगलों में एक पहाड़ी पर था जो आम आबादी वाले इलाक़े से दूर है.
बालाकोट के एक दूसरे प्रत्यक्षदर्शी वाजिद शाह ने बताया कि उन्होंने भी धमाके की आवाज़ सुनी.
उन्होंने कहा, "ऐसा लगा जैसे कि कोई राइफ़ल से फ़ायर कर रहा हो. तीन बार धमाके की आवाज़ सुनाई दी, फिर ख़ामोशी छा गई."
Tuesday, February 26, 2019
Wednesday, February 20, 2019
पुलवामा हमले की पाकिस्तान ने निंदा तक नहीं कीः जेटली
पुलवामा हमले को लेकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के दावों को ख़ारिज करते हुए भारत के वित्त मंत्री अरूण जेटली ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने तो हमले की निंदा तक नहीं की है.
सबूत देने के मसले पर अरुण जेटली ने कहा, " जब अपराध करवाने वाला जब ये स्वीकार कर रहा है तो फिर ये अप्रत्यक्ष इंटेलिजेंस देने का क्या मतलब है. "
उन्होंने कहा," पाकिस्तान की धरती का प्रयोग इस आतंक के लिए किया गया है, जो पहले भी किया जाता रहा है. इसलिए पाकिस्तान का जो स्टैंड है उसकी पूरे विश्व में कोई विश्वसनीयता नहीं है."
इससे पहले इमरान ख़ान की बातों पर भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि जिस तरह से इमरान ख़ान ने हमले के पीछे पाकिस्तान की भूमिका से इनकार किया है, उसमें अचरज जैसी बात नहीं है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक पाकिस्तान हमेशा आतंकी हमले में किसी संलिप्ता से इनकार करता रहा है. मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने जैश-ए-मोहम्मद के दावे की भी उपेक्षा की है.
भारत के मुताबिक जैश-ए-मोहम्मद और उसके नेता मसूद अज़हर का ठिकाना पाकिस्तान में है और ये बात किसी से छुपी नहीं है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इस मामले पर भारत को सबूत देने को कहा ताकि जांच में मदद कर सके.
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक ये एक कमजोर बहाना है, क्योंकि 26 नवंबर, 2011 के मुंबई हमले के सबूत पाकिस्तान को देने के बाद भी दस साल बाद भी मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा कि पाकिस्तान को नया पाकिस्तान कहा है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में पूछा है कि नया पाकिस्तान कैसा पाकिस्तान है जिसमें मौजूदा सरकार के मंत्री हफ़ीज सईद जैसी आतंकी के साथ सार्वजनिक तौर पर प्लेटफ़ार्म शेयर करते हैं.
हालांकि भारत ने बातचीत के पहल के बारे में कहा कि भारत हमेशा विस्तृत द्विपक्षीय बातचीत के लिए तैयार है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने पुलवामा हमले को भारत के आने वाले चुनाव से जोड़कर भी देखा था, जिसको भारतीय विदेश मंत्रालय ने बेहद दुखद बताया है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बरगलाना बंद करे और पुलवामा हमले के दोषियों पर ऐसी कार्रवाई करे जो विश्वसनीय हो और लोगों को नज़र भी आए.
जिस तरह पाकिस्तानी अपने मुल्क को देखते हैं, ज़रूरी तो नहीं कि बाक़ी दुनिया भी पाकिस्तान को वैसे ही देखे. इसी तरह जैसे हिन्दुस्तानी भारत को देखते हैं, ज़रूरी तो नहीं कि विदेशी भी भारत को इसी दृष्टि से देखें.
जनता की भावनाएं, मीडिया के एक्शन से भरपूर मांगें, नेताओं के मुंह से निकलने वाले झाग अपनी जगह, मगर सरकारों को किसी भी एक्शन या रिएक्शन से पहले दस तरह की और चीज़ें भी सोचनी पड़ती हैं.
अब पुलवामा के घातक हमले को ही ले लें. या इससे पहले पठानकोट और उड़ी की घटना या 2008 के मुंबई हमले या 1993 के मुंबई में दर्जन भर बम विस्फोटों से फैली बर्बादी. सबूत, ताना-बाना और ग़ुस्सा अपनी-अपनी जगह मगर इसके बाद क्या?
युद्ध होना होता तो 13 दिसंबर 2001 को हो जाना चाहिए था जब लोकसभा बिल्डिंग पर चरमपंथी हमला हुआ था.
दो दिन बाद रक्षा मंत्रालय की तरफ़ से सेना को मार्चिंग ऑर्डर मिल चुके थे. 1971 के बांग्लादेश युद्ध के बाद पाकिस्तान से मिली सीमा पर भारतीय सेना की ये सबसे बड़ी तैनाती थी.
दोनों तरफ़ की फ़ौजें पंजाब से गुजरात तक एक दूसरे के दीदों में दीदें डाली घूरती रहीं और फिर 8000 करोड़ रुपये ख़र्च करने के बाद सेना डेढ़ वर्ष के बाद अगले मोर्चों से वापिस.
इस बार भी जब तक ग़ुस्सा ठंडा नहीं हो जाता तब तक चाहें तो सेना को एड़ियों पर खड़ा रखें. चुनाव में पुलवामा को मुद्दे के तौर पर पूरी तरीक़े से सब पार्टियां इस्तेमाल करें.
दोनों देश इस्लामाबाद और दिल्ली से लंबे समय के लिए राजदूत बुलवा लें. आर्थिक व सांस्कृतिक दौरे और तबादले रोक दें. एक-दूसरे के ख़िलाफ़ गुप्त कार्रवाईयां और तेज़ कर दें, मगर फिर- इसके बाद?
चीन हो या रूस या अमरीका या सऊदी अरब या यूरोपीय यूनियन- हर कोई बाक़ी संसार और उसकी मुश्किलों को अपने-अपने हिसाब से देखता है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोस्ती भी मोल-तोल में होती है और दुश्मनी भी गणित के हिसाब से होती है.
इस वक़्त अगर इलाक़े में अफ़ग़ानिस्तान को सुलटाने के लिए अमरीका को पाकिस्तान की ज़रूरत न होती तो अब तक ट्रंप साहब पुलवामा पर कम से कम पांच ट्वीट कर चुके होते.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ये मामला उठाया ज़रूर जा सकता है मगर चीन वीटो कर देगा. सऊदी अरब को जितनी भारत की ज़रूरत है उससे ज़्यादा सऊदी अरब को पाकिस्तान की.
ईरान और भारत मिलकर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कोई मोर्चा बना लें ऐसा नज़र नहीं आता.
क्या भारत को पाकिस्तान पर हमला कर देना चाहिए? दिल भले चाह रहा हो पर फ़िलहाल हालात इस क़ाबिल नहीं.
लेकिन, पुलवामा में जो बारूद इस्तेमाल हुआ वो सीमा पार से स्मगल हुआ? जिसने गाड़ी टकराई वो सीमा पार से आया? उसका हैंडलर लोकल था या सीमा की दूसरी तरफ़ बैठा था?
क्या कश्मीर में मिलिटेन्सी आज भी बाहर से कंट्रोल होती है या अब उसका अंदरूनी ढांचा बन चुका है?
और दहश्तगर्दी की भट्टी में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल बलूचिस्तान से कश्मीर तक मुसलसल क्यों पैदा हो रहा है?
इस पर कोई भी सरकार रोक क्यों नहीं लगा पा रही?
सब जानते हैं पर जवाब कौन देगा. दुश्मनी में सबसे पहली लाश सच्चाई की गिरती है- मानो कि ना मानो.
सबूत देने के मसले पर अरुण जेटली ने कहा, " जब अपराध करवाने वाला जब ये स्वीकार कर रहा है तो फिर ये अप्रत्यक्ष इंटेलिजेंस देने का क्या मतलब है. "
उन्होंने कहा," पाकिस्तान की धरती का प्रयोग इस आतंक के लिए किया गया है, जो पहले भी किया जाता रहा है. इसलिए पाकिस्तान का जो स्टैंड है उसकी पूरे विश्व में कोई विश्वसनीयता नहीं है."
इससे पहले इमरान ख़ान की बातों पर भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि जिस तरह से इमरान ख़ान ने हमले के पीछे पाकिस्तान की भूमिका से इनकार किया है, उसमें अचरज जैसी बात नहीं है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक पाकिस्तान हमेशा आतंकी हमले में किसी संलिप्ता से इनकार करता रहा है. मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने जैश-ए-मोहम्मद के दावे की भी उपेक्षा की है.
भारत के मुताबिक जैश-ए-मोहम्मद और उसके नेता मसूद अज़हर का ठिकाना पाकिस्तान में है और ये बात किसी से छुपी नहीं है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इस मामले पर भारत को सबूत देने को कहा ताकि जांच में मदद कर सके.
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक ये एक कमजोर बहाना है, क्योंकि 26 नवंबर, 2011 के मुंबई हमले के सबूत पाकिस्तान को देने के बाद भी दस साल बाद भी मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा कि पाकिस्तान को नया पाकिस्तान कहा है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में पूछा है कि नया पाकिस्तान कैसा पाकिस्तान है जिसमें मौजूदा सरकार के मंत्री हफ़ीज सईद जैसी आतंकी के साथ सार्वजनिक तौर पर प्लेटफ़ार्म शेयर करते हैं.
हालांकि भारत ने बातचीत के पहल के बारे में कहा कि भारत हमेशा विस्तृत द्विपक्षीय बातचीत के लिए तैयार है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने पुलवामा हमले को भारत के आने वाले चुनाव से जोड़कर भी देखा था, जिसको भारतीय विदेश मंत्रालय ने बेहद दुखद बताया है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बरगलाना बंद करे और पुलवामा हमले के दोषियों पर ऐसी कार्रवाई करे जो विश्वसनीय हो और लोगों को नज़र भी आए.
जिस तरह पाकिस्तानी अपने मुल्क को देखते हैं, ज़रूरी तो नहीं कि बाक़ी दुनिया भी पाकिस्तान को वैसे ही देखे. इसी तरह जैसे हिन्दुस्तानी भारत को देखते हैं, ज़रूरी तो नहीं कि विदेशी भी भारत को इसी दृष्टि से देखें.
जनता की भावनाएं, मीडिया के एक्शन से भरपूर मांगें, नेताओं के मुंह से निकलने वाले झाग अपनी जगह, मगर सरकारों को किसी भी एक्शन या रिएक्शन से पहले दस तरह की और चीज़ें भी सोचनी पड़ती हैं.
अब पुलवामा के घातक हमले को ही ले लें. या इससे पहले पठानकोट और उड़ी की घटना या 2008 के मुंबई हमले या 1993 के मुंबई में दर्जन भर बम विस्फोटों से फैली बर्बादी. सबूत, ताना-बाना और ग़ुस्सा अपनी-अपनी जगह मगर इसके बाद क्या?
युद्ध होना होता तो 13 दिसंबर 2001 को हो जाना चाहिए था जब लोकसभा बिल्डिंग पर चरमपंथी हमला हुआ था.
दो दिन बाद रक्षा मंत्रालय की तरफ़ से सेना को मार्चिंग ऑर्डर मिल चुके थे. 1971 के बांग्लादेश युद्ध के बाद पाकिस्तान से मिली सीमा पर भारतीय सेना की ये सबसे बड़ी तैनाती थी.
दोनों तरफ़ की फ़ौजें पंजाब से गुजरात तक एक दूसरे के दीदों में दीदें डाली घूरती रहीं और फिर 8000 करोड़ रुपये ख़र्च करने के बाद सेना डेढ़ वर्ष के बाद अगले मोर्चों से वापिस.
इस बार भी जब तक ग़ुस्सा ठंडा नहीं हो जाता तब तक चाहें तो सेना को एड़ियों पर खड़ा रखें. चुनाव में पुलवामा को मुद्दे के तौर पर पूरी तरीक़े से सब पार्टियां इस्तेमाल करें.
दोनों देश इस्लामाबाद और दिल्ली से लंबे समय के लिए राजदूत बुलवा लें. आर्थिक व सांस्कृतिक दौरे और तबादले रोक दें. एक-दूसरे के ख़िलाफ़ गुप्त कार्रवाईयां और तेज़ कर दें, मगर फिर- इसके बाद?
चीन हो या रूस या अमरीका या सऊदी अरब या यूरोपीय यूनियन- हर कोई बाक़ी संसार और उसकी मुश्किलों को अपने-अपने हिसाब से देखता है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोस्ती भी मोल-तोल में होती है और दुश्मनी भी गणित के हिसाब से होती है.
इस वक़्त अगर इलाक़े में अफ़ग़ानिस्तान को सुलटाने के लिए अमरीका को पाकिस्तान की ज़रूरत न होती तो अब तक ट्रंप साहब पुलवामा पर कम से कम पांच ट्वीट कर चुके होते.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ये मामला उठाया ज़रूर जा सकता है मगर चीन वीटो कर देगा. सऊदी अरब को जितनी भारत की ज़रूरत है उससे ज़्यादा सऊदी अरब को पाकिस्तान की.
ईरान और भारत मिलकर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कोई मोर्चा बना लें ऐसा नज़र नहीं आता.
क्या भारत को पाकिस्तान पर हमला कर देना चाहिए? दिल भले चाह रहा हो पर फ़िलहाल हालात इस क़ाबिल नहीं.
लेकिन, पुलवामा में जो बारूद इस्तेमाल हुआ वो सीमा पार से स्मगल हुआ? जिसने गाड़ी टकराई वो सीमा पार से आया? उसका हैंडलर लोकल था या सीमा की दूसरी तरफ़ बैठा था?
क्या कश्मीर में मिलिटेन्सी आज भी बाहर से कंट्रोल होती है या अब उसका अंदरूनी ढांचा बन चुका है?
और दहश्तगर्दी की भट्टी में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल बलूचिस्तान से कश्मीर तक मुसलसल क्यों पैदा हो रहा है?
इस पर कोई भी सरकार रोक क्यों नहीं लगा पा रही?
सब जानते हैं पर जवाब कौन देगा. दुश्मनी में सबसे पहली लाश सच्चाई की गिरती है- मानो कि ना मानो.
Thursday, February 14, 2019
पिता को बदमाशों ने मारी गोलियां, घायल होने के बावजूद 6 किमी दूर बेटी को परीक्षा केंद्र पहुंचाया
बेगूसराय में बेटी को इंटर की परीक्षा दिलाने जा रहे पूर्व मुखिया और राजद नेता रामकृपाल महतो को बदमाशों ने बुधवार को गोली मार दी। इसके बावजूद घायल रामकृपाल ने 6 किलोमीटर बाइक चलाकर इंटर की परीक्षार्थी बेटी को जेके स्कूल स्थित सेंटर पर पहुंचाया। बेटी परीक्षा देने सेंटर के अंदर चली गई, इसके बाद वे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे। उन्हें दो गोलियां लगी थीं। उनके परिवार का कहना है कि वे बेटी के करिअर को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने अपनी परवाह नहीं की।
बेटी ने हिम्मत के साथ बदमाशों का सामना किया
पुलिस के मुताबिक, महतो अपनी बेटी दामिनी को बाइक पर परीक्षा दिलाने सेंटर ले जा रहे थे। तभी बदमाशों ने रामकृपाल के सिर पर पिस्तौल तान कर उनकी कनपटी में गोली मारने की कोशिश की। बाइक पर पीछे बैठी बेटी ने हिम्मत के साथ इन बदमाशों का सामना किया और पिस्तौल छीनने की कोशिश की। इससे गोली पिता की कनपटी की बजाय सीने में जाकर लगी। गोली चलने के कारण दामिनी के दोनों हाथ बारूद की वजह से मामूली जख्मी हो गए।
हमला सुबह 8:30 बजे हुआ
आपराधियों ने हमला वीरपुर थाना क्षेत्र के फुलकारी और कारीचक के बीच स्थित लतराही में सुबह करीब साढ़े आठ बजे किया गया। उन्हें दो गोली मारी गईं। उनका इलाज बेगूसराय के एक निजी क्लिनिक में किया जा रहा है। जहां उनकी हालत गंभीर है।
महतो के सीने में बाईं और दाईं तरफ गोलियां लगी हैं। गोली मारने के बाद अपराधी दो बाइक से वीरपुर की ओर भाग गए। अपराधियों की तादाद 6 बताई जा रही है।
दामिनी ने बताया, "हमलावरों ने पापा की कनपटी में पिस्तौल लगा दी थी। वे तो मार ही डालते, मैंने लिपटकर उनकी जान बचाई। मेरा आज इंग्लिश का पेपर था। पापा के साथ मैं बाइक पर पीछे बैठकर जेके हाईस्कूल जा रही थी। 8 से 8.30 के करीब जैसे ही हम लोग लतराही के पास पहुंचे कि वहां घात लगाए पांच-छह बदमाशों ने बाइक को घेर लिया। एक ने कमर से पिस्तौल निकालकर पापा की कनपटी पर सटा दी। मैं बहुत घबरा गई और जोर-जोर से चिल्लाने लगी और पापा को बचाने के लिए उनसे लिपट गई।"
"मैंने पिस्तौल पर हाथ मारा तभी धायं की आवाज हुई। तभी पापा के सीने से खून निकलने लगा। आसपास के कुछ लोग दौड़कर हमारी तरफ आने लगे। इसे देखकर सभी बदमाश वहां से भाग निकले। इस बीच उन्होंने एक ओर गोली चलाई जो फिर पापा को लगी। मेरे दोनों हाथों में जलन होने लगी थी।"
"मैंने देखा गोली के बारूद से मेरी हथेली जल गई थी। तब मैंने पापा से कहा कि पापा अस्पताल चलिए, तो उन्होंने कहा- नहीं मैं ठीक हूं... पहले तुम गाड़ी पर बैठो, मैं तुम्हें परीक्षा सेंटर पर छोड़ दूं। नहीं तो तुम्हारा एक साल बर्बाद हो जाएगा। फिर हम छह किलोमीटर दूर सेंटर पर पहुंचे। मैं वहां से सेंटर के अंदर चली गई। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो पापा के पास काफी लोग जमा हो गए थे। शायद उन्होंने ही पापा को क्लिनिक पहुंचाया।"
बेटी ने हिम्मत के साथ बदमाशों का सामना किया
पुलिस के मुताबिक, महतो अपनी बेटी दामिनी को बाइक पर परीक्षा दिलाने सेंटर ले जा रहे थे। तभी बदमाशों ने रामकृपाल के सिर पर पिस्तौल तान कर उनकी कनपटी में गोली मारने की कोशिश की। बाइक पर पीछे बैठी बेटी ने हिम्मत के साथ इन बदमाशों का सामना किया और पिस्तौल छीनने की कोशिश की। इससे गोली पिता की कनपटी की बजाय सीने में जाकर लगी। गोली चलने के कारण दामिनी के दोनों हाथ बारूद की वजह से मामूली जख्मी हो गए।
हमला सुबह 8:30 बजे हुआ
आपराधियों ने हमला वीरपुर थाना क्षेत्र के फुलकारी और कारीचक के बीच स्थित लतराही में सुबह करीब साढ़े आठ बजे किया गया। उन्हें दो गोली मारी गईं। उनका इलाज बेगूसराय के एक निजी क्लिनिक में किया जा रहा है। जहां उनकी हालत गंभीर है।
महतो के सीने में बाईं और दाईं तरफ गोलियां लगी हैं। गोली मारने के बाद अपराधी दो बाइक से वीरपुर की ओर भाग गए। अपराधियों की तादाद 6 बताई जा रही है।
दामिनी ने बताया, "हमलावरों ने पापा की कनपटी में पिस्तौल लगा दी थी। वे तो मार ही डालते, मैंने लिपटकर उनकी जान बचाई। मेरा आज इंग्लिश का पेपर था। पापा के साथ मैं बाइक पर पीछे बैठकर जेके हाईस्कूल जा रही थी। 8 से 8.30 के करीब जैसे ही हम लोग लतराही के पास पहुंचे कि वहां घात लगाए पांच-छह बदमाशों ने बाइक को घेर लिया। एक ने कमर से पिस्तौल निकालकर पापा की कनपटी पर सटा दी। मैं बहुत घबरा गई और जोर-जोर से चिल्लाने लगी और पापा को बचाने के लिए उनसे लिपट गई।"
"मैंने पिस्तौल पर हाथ मारा तभी धायं की आवाज हुई। तभी पापा के सीने से खून निकलने लगा। आसपास के कुछ लोग दौड़कर हमारी तरफ आने लगे। इसे देखकर सभी बदमाश वहां से भाग निकले। इस बीच उन्होंने एक ओर गोली चलाई जो फिर पापा को लगी। मेरे दोनों हाथों में जलन होने लगी थी।"
"मैंने देखा गोली के बारूद से मेरी हथेली जल गई थी। तब मैंने पापा से कहा कि पापा अस्पताल चलिए, तो उन्होंने कहा- नहीं मैं ठीक हूं... पहले तुम गाड़ी पर बैठो, मैं तुम्हें परीक्षा सेंटर पर छोड़ दूं। नहीं तो तुम्हारा एक साल बर्बाद हो जाएगा। फिर हम छह किलोमीटर दूर सेंटर पर पहुंचे। मैं वहां से सेंटर के अंदर चली गई। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो पापा के पास काफी लोग जमा हो गए थे। शायद उन्होंने ही पापा को क्लिनिक पहुंचाया।"
Thursday, February 7, 2019
चार कैमरे वाला Galaxy A9 हुआ 3,000 रुपये सस्ता
साउथ कोरियन कंपनी सैमसंग ने Galaxy A9 की कीमतें कम कर दी हैं. भारत में इस स्मार्टफोन को कंपनी ने पिछले साल नवंबर में लॉन्च किया था. यह पहला स्मार्टफोन है जिसमें चार रियर कैमरे दिए गए हैं. इसे कंपनी ने 36,990 रुपये में लॉन्च किया था. हालांकि इसके बाद कंपनी ने इसकी कीमत कम की और अब दूसरी बार इसकी कीमत घटाई गई है.
प्राइस कट के बाद अब यह स्मार्टफोन 30,999 रुपये में मिल रहा है. इस बार कंपनी ने इस स्मार्टफोन को 3,000 रुपये सस्ता करने का फैसला किया है. मार्केट में स्मार्टफोन की रेस को देखते हुए शायद कंपनी ने ऐसा किया है. नई कीमत के साथ आप इस स्मार्टफोन को सैमसंग इंडिया ऑनलाइन स्टोर से खरीद सकते हैं. यह स्मार्टफोन अब भारत में शाओमी के Poco F1 को टक्कर दे सकता है.
Samsung Galaxy A9 में 6.3 इंच की फुल एचडी प्लस सुपर AMOLED डिस्प्ले दी गई है. इस स्मार्टफोन में 2.2GHz ऑक्टाकोर स्नैपड्रैगन 660 पोसेसर है. इस स्मार्टफोन में 8GB रैम और 128GB की इंटर्नलर मेमोरी है. हालांकि इसका 6GB वाला वेरिएंट भी है. माइक्रो एसडी कार्ड के जरिए इसे 512GB तक बढ़ाया जा सकता है.
इस स्मार्टफोन की खासियत इसमें दिया गया चार रियर कैमरा है. प्राइमरी कैमरा 24 मेगापिक्सल का है और इसका अपर्चर f/1.7 है, दूसरा कैमरा 10 मेगापिक्सल का है जो टेलीफोटो लेंस है. इसमें 2X ऑप्टिकल जूम भी है. तीसरा कैमरा 8 मेगापिक्सल का है और यह 120 डिग्री वाइड एंगल लेंस है जिसका अपर्चर f/2.4 है. चैथा कैमरा 5 मेगापिक्सल का है जो डेप्थ सेंसिंग के लिए है और इसका अपर्चर f/2.2 है.
Galaxy A9 में 3,800mAh की बैटरी दी गई है और इसमें यूएसबी टाइप सी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी Galaxy A9 Pro (2019) लॉन्च करने की तैयारी में है. इसे कंपनी ने साउथ कोरिया में पहले ही पेश किया है. शायद इसलिए Galaxy A9 की कीमतें कम की जा रही हैं.
ईडी के सूत्रों ने आजतक को बताया कि रॉबर्ट वाड्रा ने कथित रूप से भंडारी के रिश्तेदार सुमित को ई-मेल कर साफ निर्देश दिए थे. सुमित चड्ढा ने संजय भंडारी और रॉबर्ट वाड्रा को मार्क कर कई ई-मेल भेजे थे.
सूत्रों ने बताया कि बुधवार को पूछताछ करने वाले अधिकारी वाड्रा के जवाब से बहुत संतुष्ट नहीं थे और इसीलिए उन्हें गुरुवार सुबह 10.30 बजे फिर से हाजिर होने का आदेश दिया गया. आजतक को यह भी पता चला है कि पूछताछ के दौरान वाड्रा ने इस बात से साफ इंकार किया है कि उनका संजय भंडारी या उसके रिश्तेदार सुमित चड्ढा से किसी तरह का कोई कारोबारी रिश्ता है. हालांकि वाड्रा ने यह स्वीकार किया है कि वह मनोज अरोड़ा को जानते हैं, क्योंकि वह कभी उनके कंपनी में काम करता था, लेकिन उन्होंने कभी भी अरोड़ा को अपनी तरफ से कोई मेल करने का निर्देश नहीं दिया था. वाड्रा ने इस बात से भी साफ इंकार किया कि लंदन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनके मालिकाना में कोई प्रॉपर्टी है.
वाड्रा से डिप्टी डायरेक्टर और असिस्टेंट डायरेक्टर स्तर के तीन ईडी अधिकारियों की टीम ने पूछताछ किए थे. वाड्रा से कई तरह के लेन-देन, खरीद और लंदन में कई तरह की अचल संपत्तियों के बारे में पूछताछ की गई. यह मामला तब सामने आया था, जब ईडी ने रॉबर्ट वाड्रा के करीबी सहयोगी मनोज अरोड़ा के खिलाफ जांच शुरू की थी. वह वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटलिटी एलएलपी से जुड़े एक फर्म का कर्मचारी था.
प्राइस कट के बाद अब यह स्मार्टफोन 30,999 रुपये में मिल रहा है. इस बार कंपनी ने इस स्मार्टफोन को 3,000 रुपये सस्ता करने का फैसला किया है. मार्केट में स्मार्टफोन की रेस को देखते हुए शायद कंपनी ने ऐसा किया है. नई कीमत के साथ आप इस स्मार्टफोन को सैमसंग इंडिया ऑनलाइन स्टोर से खरीद सकते हैं. यह स्मार्टफोन अब भारत में शाओमी के Poco F1 को टक्कर दे सकता है.
Samsung Galaxy A9 में 6.3 इंच की फुल एचडी प्लस सुपर AMOLED डिस्प्ले दी गई है. इस स्मार्टफोन में 2.2GHz ऑक्टाकोर स्नैपड्रैगन 660 पोसेसर है. इस स्मार्टफोन में 8GB रैम और 128GB की इंटर्नलर मेमोरी है. हालांकि इसका 6GB वाला वेरिएंट भी है. माइक्रो एसडी कार्ड के जरिए इसे 512GB तक बढ़ाया जा सकता है.
इस स्मार्टफोन की खासियत इसमें दिया गया चार रियर कैमरा है. प्राइमरी कैमरा 24 मेगापिक्सल का है और इसका अपर्चर f/1.7 है, दूसरा कैमरा 10 मेगापिक्सल का है जो टेलीफोटो लेंस है. इसमें 2X ऑप्टिकल जूम भी है. तीसरा कैमरा 8 मेगापिक्सल का है और यह 120 डिग्री वाइड एंगल लेंस है जिसका अपर्चर f/2.4 है. चैथा कैमरा 5 मेगापिक्सल का है जो डेप्थ सेंसिंग के लिए है और इसका अपर्चर f/2.2 है.
Galaxy A9 में 3,800mAh की बैटरी दी गई है और इसमें यूएसबी टाइप सी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी Galaxy A9 Pro (2019) लॉन्च करने की तैयारी में है. इसे कंपनी ने साउथ कोरिया में पहले ही पेश किया है. शायद इसलिए Galaxy A9 की कीमतें कम की जा रही हैं.
ईडी के सूत्रों ने आजतक को बताया कि रॉबर्ट वाड्रा ने कथित रूप से भंडारी के रिश्तेदार सुमित को ई-मेल कर साफ निर्देश दिए थे. सुमित चड्ढा ने संजय भंडारी और रॉबर्ट वाड्रा को मार्क कर कई ई-मेल भेजे थे.
सूत्रों ने बताया कि बुधवार को पूछताछ करने वाले अधिकारी वाड्रा के जवाब से बहुत संतुष्ट नहीं थे और इसीलिए उन्हें गुरुवार सुबह 10.30 बजे फिर से हाजिर होने का आदेश दिया गया. आजतक को यह भी पता चला है कि पूछताछ के दौरान वाड्रा ने इस बात से साफ इंकार किया है कि उनका संजय भंडारी या उसके रिश्तेदार सुमित चड्ढा से किसी तरह का कोई कारोबारी रिश्ता है. हालांकि वाड्रा ने यह स्वीकार किया है कि वह मनोज अरोड़ा को जानते हैं, क्योंकि वह कभी उनके कंपनी में काम करता था, लेकिन उन्होंने कभी भी अरोड़ा को अपनी तरफ से कोई मेल करने का निर्देश नहीं दिया था. वाड्रा ने इस बात से भी साफ इंकार किया कि लंदन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनके मालिकाना में कोई प्रॉपर्टी है.
वाड्रा से डिप्टी डायरेक्टर और असिस्टेंट डायरेक्टर स्तर के तीन ईडी अधिकारियों की टीम ने पूछताछ किए थे. वाड्रा से कई तरह के लेन-देन, खरीद और लंदन में कई तरह की अचल संपत्तियों के बारे में पूछताछ की गई. यह मामला तब सामने आया था, जब ईडी ने रॉबर्ट वाड्रा के करीबी सहयोगी मनोज अरोड़ा के खिलाफ जांच शुरू की थी. वह वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटलिटी एलएलपी से जुड़े एक फर्म का कर्मचारी था.
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