Tuesday, May 28, 2019

【体育广角镜】当爱好成为职业:电竞选手的正名之路

  中新网客户端北京5月28日电(王禹)“如果不做电竞选手,我现在可能正在读研究生吧。”已经在电竞行业摸爬滚打了4年的张星冉(ID:Zoom),在回忆自己的职业生涯时如是说道。

  “当初我在学校的成绩是一本到二本之间”。出生于湖北荆州的张星冉,得益于当地良好的教育,在学业上一直处于中上游水平。但在17岁那一年,准备给自己的人生做进一步规划时,他的思绪始终被一样东西魂牵梦绕——英雄联盟。

  早在中考结束后,暂时卸下包袱的张星冉第一次接触到这个游戏,后来即使学业繁重,他依然展现了在电竞方面的天赋,闯进国内前一百,与职业选手对决也不遑多让,这让张星冉在内心深处埋下了一颗成为电竞选手的种子。

  尽管张星冉的兄弟姐妹都在清华、北大等著名学府深造,但家里人抱着“行行出状元”的心态,在张星冉决定当电竞选手这件事上并没有过多阻拦。于是在2015年,他收拾行囊前往宁波,开启了自己的职业之路。

  相比张星冉,队友左名豪(ID:LvMao)的起步则略显坎坷。与大多数电竞选手一样,父母对于他决定从事电竞并不支持,“一开始不太理解,但是后来我能挣到钱,可以养家了,他们才明白这是新兴行业,逐渐认可我从事的职业。”

  从十八岁那年开始接触电竞,左名豪的起步已经比其他人晚了一步。最初他也只是当作休闲娱乐,“我就发现自己水平还挺高的,很快打进了国服前几。”很快,他的表现引起了一家俱乐部的注意,成为了一名职业选手。

  但此后还没有打出名堂的左名豪只能混迹于次级联赛,这里鱼龙混杂,有年轻选手为了出人头地而拼搏,也有进入职业生涯末期的选手惶惶度日,但更多的选手在长期不被人关注的情况下,内心满是茫然和无措。

  与左名豪多次冲击顶级联赛未果,开始陷入自我怀疑一样,张星冉也曾一度在这里迷失,“我慢慢产生了困惑,不知道自己到底该怎么做,目标也越来越不明确。反正也没人关注,也不是很努力。”

  现状越是让左名豪心灰意冷,他越是告诫自己千万不能在这种时候倒下。他们不知道的是,自己的天赋在当时已经被别人看在眼里,2017年前后,决心重建的JDG俱乐部终于给了他们一个登上更大舞台的机会。

  越艰苦,越坚持

  ——“只有最好的团队,才能成就最好的自己”

  4月25日,是JDG电子竞技战队英雄联盟分部放假的日子。在结束了一个赛季的征战过后,队员们终于拥有了近两周的休息时间。已经成为队长的左名豪在基地调试着自己的电脑,为接下来的假期做准备。

  没有联赛期间的紧张气氛,这样的日子在一年中并不多见。而就在4天前,JDG以黑马姿态一路过关斩将,闯入LPL(英雄联盟国内最高级别联赛)季后赛决赛,但0:3不敌世界冠军IG战队,带着遗憾离开。

  这是左名豪征战顶级联赛的第四个赛季,也是他距离冠军最近的一次。因为此前几个赛季战队经历起伏,所以为了通过这场决赛证明自己,他与张星冉以及其他三名队友卯足了劲全力以赴在准备。

  从中午12点起床到第二天凌晨2点,期间除了吃饭以及餐后的半个小时休息,其他的时间全部用于个人训练以及与其他战队进行训练赛。持续14个小时的训练如果感觉不够,张星冉一般都会加练到3点半。而这样的情况也并非只有季后赛才会出现。

  赛季开始之初,战队的状态跌入低谷,成绩一落千丈的同时,训练赛也连战连败。训练赛结束后,整个训练室压抑得只听得见空调的声音。不过好在队员们没有因此失去信任,而是默默的增加训练量并改进自己的问题。

  正是凭借不服输的精神,张星冉和左名豪逐渐成为国内选手的佼佼者。然而当爱好成为工作,心理上的转变会通常会令人难以接受。张星冉就坦言有时候会感觉特别累,“但不管从事什么样的职业,想要做好一件事都会付出很多努力,所以无论如何都要坚持下去,就算累也得坚持下去。”

  一支战队,五位选手各司其职,既要求个人能力也强调团队协作。成为世界冠军是每一支战队的目标,当谈及个人理想是,张星冉却没有给出明确的答案,他说:“团队让我成长了很多,只有最好的团队,才能成就最好的自己。”

Tuesday, May 21, 2019

英国王室妯娌秀 梅根凯特接连公布幕后照片

首先是萨塞克斯公爵及公爵夫人哈里王子和梅根在周日(5月19日)纪念结婚一周年,向外公布了一组婚礼幕后照片。

在社交媒体Instagram上,哈里和梅根用14张照片组成小视频,配乐是他俩婚礼当天离开温莎教堂时所唱的赞美诗歌《我的这束小光芒》

紧接着哈里和梅根的照片,哥嫂威廉和凯特也公开了与3个孩子的照片。这些照片和视频显示剑桥公爵和公爵夫人一家周日(5月19日)在即将开幕的伦敦切尔西花展中由凯特设计的花园里玩耍。

这个花园取名为“回到自然”。过去一个月,威廉和凯特的3个孩子:乔治王子、夏洛特公主和路易王子帮着妈妈搜集的树叶、青苔和树枝,都放在这个花园中

哈里王子和威廉王子在同一天公布这些照片,难免又让小报说三道四,揣测已经传言了一段时间的妯娌不合还在继续。

《每日快报》(Daily Express)说,王室中的这两对年轻夫妇“给持续了数月的不合传闻又添了新的素材”,他们之间越来越像在玩一场“攀比游戏”(a game of one-upmanship)。

随着人们越来越多地使用社交媒体,英国王室也在与时俱进。在年轻一代的王室成员中,哈里王子与梅根频繁地与公众通过社交媒体互动。他们二人在社交平台Instagram,已经有820万粉丝。

而92岁的英国女王伊丽莎白二世也开始通过社交媒体发布消息。今年3月7日,女王在走访伦敦的科学博物馆(Science Museum)后,第一次通过Instagram发布了一张照片,显示在皇家档案中的一封信。这封信是数学家及电脑先驱人物查尔斯·巴比基(Charles Babbage)1843年写给女王的曾曾祖父,即维多利亚女王的丈夫阿尔伯特亲王的。

上周,英国白金汉宫的一则招聘广告吸引了全世界媒体的注意:女王招聘一名社交媒体管理主任。招聘广告要求,“无论是报道国事访问,颁奖典礼还是王室活动,你将确保我们的各个电子频道不断散发兴趣亮点,传递到广泛的观众群中。”

Tuesday, May 14, 2019

चीन में देह व्यापारः पाकिस्तानी दुल्हनों की आपबीती

हाल के दिनों में पाकिस्तानी मीडिया में शादी का झांसा देकर चीन ले जाई गई लड़कियों की कहानियां छाई रहीं. शादी के नाम पर तस्करी करके ले जाई गईं इन लड़कियों को हिंसा का सामना करना पड़ा और कई को जिस्मफ़रोशी में धकेल दिया गया. इनसे ग़ैर-क़ानूनी अंगदान कराए जाने के गंभीर आरोप भी लगे हैं.

पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी एफ़आईए के मुताबिक़ अब तक उसके पास ऐसे सैकड़ों मामले आ चुके हैं.

वहीं बीजिंग में पाकिस्तानी दूतावास के अधिकारियों का कहना है कि हर दिन दो-तीन मामले उनके सामने आ रहे हैं. कभी पीड़िता स्वयं तो कभी उनके परिवार वाले मदद की गुहार लगा रहे हैं. दूतावास के मुताबिक़ अब तक लगभग 20 युवतियों को वापस पाकिस्तान भेजा जा चुका है.

बीबीसी ने कई ऐसी लड़कियों से बात की है जो चीनी मर्दों से शादी करके चीन गईं और फिर पाकिस्तान वापस आने में कामयाब रहीं.

मेरी उम्र बीस साल है और मैं गुजरांवाला की हूं. हमारे पड़ोसी के ज़रिए हमारे घर चीनी लड़के का रिश्ता आया था. उन्होंने मेरे घरवालों को चीनी लड़के की तस्वीरें दिखाईं और कहा कि अगर लड़के को आपकी लड़की पसंद आ गई तो उसकी ज़िंदगी बदल जाएगी.

मेरी ज़िंदगी सच में बदल गई. मेरी शादी 24 सितंबर को ली ताओ के साथ की गई. पहले मुझे एक महीने के लिए इस्लामाबाद में रखा गया. वहां मेरे अलावा तीन और लड़कियां थीं.

मेरा वीचैट पर अकाउंट भी बनाया गया लेकिन मेरा पति उसे इस्तेमाल करता था. दस्तावेज़ बनते ही हम चीन चले गए.

हवाई जहाज़, ट्रेन और कार के तीन दिन के सफर के बाद हम शंघाई के पास के शहर जियांगशू पहुंचे. ली ताओ के घर में एक कमरा और लाउंज था. पूरे घर में एक ही वॉशरूम था.

ली ताओ ने मुझे एक महिला से मिलवाया और बताया कि वो उनकी मां हैं. वो हमारे साथ ही रहती थी लेकिन ज़्यादा बात नहीं करती थीं. वो टूटी फूटी अंग्रेज़ी जानता था और मुझे भी टूटी फूटी अंग्रेज़ी आती थी तो बस बहुत कम ही बात हो पाती थी.

शादी के कुछ ही दिन बाद मेरा पति रोज शाम को नशे में धुत्त घर आता और ज़बरदस्ती सेक्स करने की मांग करता. मुझे ऐसा लगता जैसे मैं उसकी ख़रीदी हुई कोई चीज़ हूं जिसको वो जैसे चाहे इस्तेमाल करना चाहता है. मैं उसको मना करती तो वो मुझे मारता पीटता था.

मेरे माता पिता को बताया गया था कि लड़का सीपैक में नौकरी करता है. वहां जाकर पता चला कि वो एक कंप्यूटर इंजीनियर हैं. कहां कंप्यूटर इंजीनियर है ये नहीं पता चल सका.

मैं कुछ ही दिन में चीन में रहने वाली बाक़ी लड़कियों से बात करने लगी. मैं नानजिंग में रहने वाली एक लड़की को पहले से जानती थी. उसने मुझे बताया कि कुछ भी हो, उसके साथ कहीं बाहर मत जाना. उसके पति ने उसे एक डांस बार ले जाकर अपने दोस्तों के साथ छोड़ दिया था. वो बहुत चीख़ी चिल्लाई लेकिन कोई भी उसे बचाने नहीं आया.

मुझे ये बातें सुनकर डर ज़रूर लगा लेकिन अब तक मेरे पति ने मुझे अपने किसी दोस्त से नहीं मिलवाया था. तो मैं ख़ुद को तसल्ली देती रही.

फिर एक दिन ली ताओ मुझे कुछ लोगों से मिलाने बाहर ले गया. वो फ़ैक्ट्री जैसी जगह थी जहां सिर्फ़ मर्द थे. सब मुझे घूर रहे थे.

मैंने उससे पूछा कि हम यहां क्यों आए हैं लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया. मैंने उससे गाड़ी की चाबी छीन कर ख़ुद को गाड़ी में बंद कर लिया. तमाशा तो बना और समय भी बहुत बर्बाद हुआ लेकिन वो मुझे वहां से घर ले आया.

घर आकर उसने मुझे ख़ूब मारा पीटा और मुझसे मेरा फ़ोन छीन लिया. उसने मेरा वीचैट का अकाउंट भी डिलीट कर दिया. मेरा पासपोर्ट, पहचान पत्र, शादी का सर्टीफ़िकेट सब उसके पास था. उस रात मैंने अपनी नस काटने की कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हो सकी. मेरे जिस्म में इतना ख़ून ही नहीं था क्योंकि मैं तीन-तीन दिन तक खाना नहीं खाती थी.

इस घटना के दूसरे दिन मेरा पति मेरे लिए कोर्न और मशरूम का सूप लेकर आया. लेकिन उसके पीने के बाद मैं रात में किसी वक़्त उठी और मेरे सिर में बहुत तेज़ दर्द था. शायद मुझे नींद की गोलियां दी गईं थीं क्योंकि मैं बहुत चीख़ पुकार करती थी.

एक दिन हिम्मत करके मैंने स्थानीय पुलिस को फोन किया. पुलिस ने कहा कि अब चीन आपका घर है जो भी परेशानी है हमें बताएं हम हल करेंगे. मैंने कहा कि मेरे पति ने मेरा फ़ोन और सारे दस्तावेज़ छीन लिए हैं वो मुझे दिला दें. मैंने उनसे कहा कि अगर मेरी मदद नहीं की गई तो मैं आगे शिकायत करूंगी या अपनी जान दे दूंगी. पुलिस ने मेरे पति से कहा कि मेरे सारे दस्तावेज़ लौटा दे.

मैंने दस्तावेज़ मिलने के तुरंत बाद अपने परिजनों को जानकारी दी और उन्होंने चीन में पाकिस्तान के दूतावास से संपर्क किया. फिर मेरे पिता ने पाकितान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी तक को पत्र लिख दिया.

इस पूरे मामले में पांच महीने लग गए और मुझे वापस भेज दिया गया. मैं एक महीना पहले ही अपने घर वापस लौटी हूं. मेरे साथ जो होना था वो हो गया. मैंने अब बताने की हिम्मत इसलिए की क्योंकि अब लड़कियां सामने आ रही हैं और शिकायतें भी दर्ज करा रही हैं. इससे ये होगा कि और लड़कियां वहां नहीं जाएंगी.

मैं लाहौर की रहने वाली हूं. मैं मुसलमान हूं और हमारे घर में मज़हब को बहुत महत्व दिया जाता है. इसलिए जब हमारे इलाक़े के मदरसे के प्रबंधक ने मेरे घर पर रिश्ते के लिए संपर्क किया तो मेरे घर वाले मान गए क्योंकि मदरसे के प्रबंधन ने कहा था कि उन्होंने कई लड़कियों की चीन के नागरिकों से शादी करवाई है और सब बहुत ख़ुश हैं.

मुझे एक महीने तक पाकिस्तान में ही रखा गया था. वहां और भी कई लड़कियां थीं. सभी लड़कियां मेरी तरह ही ग़रीब परिवारों से ही थीं. कुछ मुसलमान जबकि ज़्यादातर ईसाई थीं. सबको अच्छे जीवन की उम्मीद थी.

पाकिस्तान में तो हमें बहुत से सब्ज़बाग़ दिखाए गए, मगर जब एक महीने बाद चीन पहुंचे तो हालात एक दम बदलना शुरू हो गए. मुझे बीजिंग के पास सानचा नाम के एक गांव में ले जाया गया. जिस जगह पर रखा गया वो एक ग़ुफ़ा थी जिसमें एक कमरा था. वहां रसोई या वॉशरूम नहीं था.

जब मैंने शोर मचाया तो मेरे पति ने मेरे मुंह पर ज़ोरदार थप्पड़ मारा और कहा कि हम तुम्हें ख़रीद कर लाए हैं. तुम कोई मांग नहीं कर सकती और ना ही इसका हक़ रखती हो.

यहां मुझे पता चला कि मेरे पति का तो कोई मज़हब ही नहीं है. जब मैं नमाज़ पढ़ने की कोशिश करती तो वो मेरा मज़ाक़ उड़ाता था. मैंने एक बार हिम्मत करके उस से पूछ लिया कि मुसलमान होने का सर्टिफ़िकेट कैसे मिला तो उसने बताया कि पैसे देकर ख़रीदा था.

वहां पहुंचने के तीसरे दिन शराब के नशे में धुत्त लोग आए और मेरे पति ने मुझसे उनके साथ जाने के लिए कहा. मैंने मना किया तो उसने वहीं उनके सामने ही मुझे मारा-पीटा. मैं बेहोश हो गई और फिर पता नहीं कि कितनी देर बाद मुझे होश आया.

Thursday, May 9, 2019

Перевыборы мэра: как Эрдоган пытается вернуть себе Стамбул

ЦИК Турции отменил результаты выборов мэра Стамбула, на которых победил кандидат от оппозиционной Народно-республиканской партии Экрем Имамоглу. Новое голосование назначено на 23 июня.

Центризбирком страны связал отмену итогов выборов с тем, что некоторые члены избирательных комиссий на участках были назначены не из числа госслужащих, а также из-за наличия не подписанных протоколов.

Президент Турции Реджеп Тайип Эрдоган назвал решение ЦИК шагом, укрепляющим демократию, в то время как сам Имамоглу заявил о намерении продолжать борьбу.

Вместе с журналистом Турецкой службы Би-би-си Чагыл Касапоглу разбираемся, что это решение ЦИК значит для всей Турции и как непризнанная победа оппозиционера может повлиять на политическое будущее президента Эрдогана.

31 марта в Турции прошли муниципальные выборы. В большинстве регионов победу одержали представители коалиции во главе с правящей Партией справедливости и развития (AKP).

Однако в крупнейших городах страны, таких как Стамбул, Измир и в столице Анкаре победу одержали представители Народно-республиканской партии (CHP) - основной оппозиционной силы.

AKP оспорила результаты выборов в Стамбуле, заявив, что они были проведены с нарушением законов. Спустя месяц ЦИК отменил своё решение о признании новым мэром Экрема Имамоглу и назначил новое голосование на 23 июня.

Почему отменили итоги?
Основной аргумент представителей АКР и самого президента основан на несоблюдении закона, согласно которому главы местных избирательных комиссий должны быть государственными служащими. В результате расследования оказалось, что некоторые из тех, кто работал на участках, ими не являются.

Учитывая причину отмены результатов выборов, турецкая оппозиция призывает пересмотреть итоги и других голосований, проведенных ранее, в том числе и референдума 2017 года, когда был упразднен пост премьер-министра, а исполнительная власть передана в руки президента.

"Но очевидно, что никто этого делать не будет", - говорит Чагыл Касапоглу.

При этом Народно-республиканская партия уже заявила, что вновь выдвигает на повторных выборах мэра Стамбула кандидатуру Экрема Имамоглу.

Такое уже было?
Подобная ситуация произошла в стране впервые, однако она отдаленно напоминает парламентские выборы 2015 года.

Тогда по итогам голосования АКР не набрала большинства в парламенте. Коалицию правящая партия создать тоже не смогла, поэтому президент Эрдоган созвал еще одни выборы, после которых его партия уже получила нужное количество голосов.

"Это, конечно, не идентичная ситуация той, что сложилась в этом году, но сейчас ее часто вспоминают. Критики утверждают, что в 2015 году АКР намеренно не сформировала коалицию, чтобы аккумулировать силы и электорат для перевыборов, которые в итоге дали им необходимое большинство", - говорит Касапоглу.

У Стамбула есть два основных фактора влияния на страну - экономический и политический. Первый заключается в том, что бюджет города составляет около 8,8 млрд долларов. Это превышает суммы, которые выделяются на большинство министерств, например, здравоохранения или юстиции.

Географически - это город, но в финансовом плане он обособлен и фактически функционирует как государство. Кроме того, Стамбул привлекает большие объемы международных инвестиций и многих крупных бизнесменов, которые могут оказать серьезную поддержку и стать основой электората того или иного кандидата.

Не стоит забывать, что около 30 больших стамбульских компаний тесно работали с властями над выполнением масштабных государственных проектов, таких как, например, строительство нового аэропорта или возведение крупнейшей в стране мечети.

С политической точки зрения пост мэра Стамбула - это отличный старт для дальнейшего карьерного роста. Достаточно вспомнить, что сам Эрдоган с 1994 по 1998 годы занимал эту должность и не раз повторял: "Если ты победил в Стамбуле, ты победил в Турции".

В Стамбуле живут представители почти всех слоев населения страны. Там есть богатые и бедные, средний класс и иммигранты - это, своего рода, демографическая выборка всей Турции.

Monday, May 6, 2019

मोदी ने कहा- दीदी बौखला गई हैं, वे जय श्रीराम कहने वालों को जेल में डाल रहीं

कोलकाता. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के तामलुक में चुनावी जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, दीदी इतनी बौखला गई हैं कि अब उन्हें भगवान की बात करना भी खटक रहा है। हालत तो यह है कि जय श्री राम कहने वालों को दीदी गिरफ्तार करवाकर जेल भेज रही हैं। मीडिया अगर न्यूट्रल होने का दावा करता है तो उसे यह खबरें आगे पहुंचानी चाहिए। दीदी के इसी रवैये की वजह से पश्चिम बंगाल में लोगों को अपने हिसाब से पूजा पाठ करने, पूरी आजादी के साथ अपने व्रत, पर्व, त्योहार मनाने में दिक्कत हो रही है।’’

उन्होंने कहा कि मैं फैनी तूफान को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बात करना चाहता था, लेकिन अहंकारी स्पीड ब्रेकरदीदी ने दो बार मेरा फोन नहीं उठाया। दीदी बौखला गई हैं, जय श्रीराम कहने वालों को जेल में डाल रहीं।

'दीदी को अपनी राजनीति की चिंता ज्यादा'

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘चक्रवात के संबंध में मैंने ममता दीदी से बात करने की कोशिश की थी। लेकिन दीदी का अहंकार इतना ज्यादा है कि उन्होंने मुझसे बात नहीं की। मैं इंतजार करता रहा कि शायद वे वापस मुझे फोन करें, लेकिन उन्होंने फोन नहीं किया। मैंने उन्हें दोबारा फोन किया। मैं पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए चिंता में था। इसलिए मुख्यमंत्री से बात करना चाहता था, लेकिन दीदी ने दूसरी बार भी मुझसे बात नहीं की।’’

‘‘दीदी को अपनी राजनीति की इतनी ज्यादा चिंता है। उन्हें पश्चिम बंगाल के लोगों की परवाह नहीं है। देशहित के ऊपर राजनीति करने की इसी आदत ने देश का नुकसान किया है।’’

‘‘स्पीडब्रेकर दीदी के इसी रवैये की वजह से बंगाल के विकास पर ब्रेक लगा हुआ है। चक्रवात से हुए नुकसान के निरीक्षण के लिए मैं यहां के प्रशासन के साथ बैठकर चर्चा करना चाहता था। भारत सरकार क्या मदद करे, इसकी जानकारी लेना चाहता था, लेकिन स्पीडब्रेकर दीदी ने उसे भी मना कर दिया।’’

‘‘दीदी की इसी राजनीति के बीच मैं बंगाल के लोगों को भरोसा देता हूं कि केंद्र सरकार पूरी सख्ती से पश्चिम बंगाल की जनता के साथ खड़ी है और राहत के कार्य में राज्य सरकार का सहयोग कर रही है।’’

‘‘भारत ने जिस तरह चक्रवात का मुकाबला किया, उसकी पूरे विश्व में चर्चा हो रही है। देशवासियों की जान और संपत्ति की रक्षा के लिए आपदा प्रबंध से जुड़े हमारे तमाम साथी निस्वार्थ भाव से जुटे रहते हैं। यह हमारा सौभाग्य है इन साथियों के लिए हमारी सरकार ने राष्ट्रीय पुरस्कार सुभाष चंद्र बोस के नाम पर ही शुरू किया है। देश की सुरक्षा करने वालों का सम्मान देश की ताकत बढ़ाता है।’’

‘‘हल्दिया को वाराणसी से जोड़ दिया गया है। मैं वाराणसी का सांसद हूं। इसका मतलब है कि मैं आपसे सीधे तौर पर जुड़ गया हूं। आज बंगाल में हर तरफ यही आवाज उठ रही है कि चूपे चाप कमल छाप, बूथ-बूथ से टीएमसी साफ।’’
'दीदी देश की तारीफ से डरती है'

मोदी ने कहा, ‘‘आपने क्या कभी दीदी को देश की तारीफ करते सुना? शायद वह डरती होगी कि मसूद अजहर पर उन्होंने कुछ बोल दिया तो उनके वोट बैंक पर खतरा हो जाएगा। इसी राजनीति ने दीदी की जमीन को खिसका दिया है। अब दीदी का राजनीतिक धरातल पर रुकना मुश्किल हो गया है।’’

'बंगाल में माफिया राज'

पीएम मोदी ने कहा, ‘‘बंगाल की स्थिति से आप भली-भांति परिचित हैं। हल्दिया पोर्ट से कंथाई तक कैसा माफिया राज यहां है, आप सभी इसके भुक्तभोगी हैं। टीएमसी के भ्रष्टाचार का मॉडल यहां स्पष्ट दिखता है। यूनिवर्सिटी में भर्ती के लिए युवा साथियों से लाखों रुपए वसूले जाते हैं। इन्होंने बंगाल को ऐसा राज्य बना दिया है जहां पढ़ाई पर टैक्स लगाया जा रहा है। ट्रिपल टी यानी तृणमूल तोलाबाजी टैक्स।’’

‘‘इस तृणमूल तोलाबाजी टैक्स से बच्चा बच्चा परिचित है। एडमिशन हो, टीचर की भर्ती हो या ट्रांसफर हो लोग बताते हैं हर जगह तृणमूल तोलाबाजी टैक्स लगता है। पश्चिम बंगाल के बच्चों का भविष्य बर्बाद करने वालों को आप सबक सिखाएं। पहले ट्रिपल टी वालों को चुनौती देने वाला ही कोई नहीं था। लेकिन अब यह लंबा चलने वाला नहीं है। भाजपा सामान्यजन, किसान, कामगार, बेटियों और युवाओं की आवाज बनकर आपके साथ खड़ी है।’’