Tuesday, May 14, 2019

चीन में देह व्यापारः पाकिस्तानी दुल्हनों की आपबीती

हाल के दिनों में पाकिस्तानी मीडिया में शादी का झांसा देकर चीन ले जाई गई लड़कियों की कहानियां छाई रहीं. शादी के नाम पर तस्करी करके ले जाई गईं इन लड़कियों को हिंसा का सामना करना पड़ा और कई को जिस्मफ़रोशी में धकेल दिया गया. इनसे ग़ैर-क़ानूनी अंगदान कराए जाने के गंभीर आरोप भी लगे हैं.

पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी एफ़आईए के मुताबिक़ अब तक उसके पास ऐसे सैकड़ों मामले आ चुके हैं.

वहीं बीजिंग में पाकिस्तानी दूतावास के अधिकारियों का कहना है कि हर दिन दो-तीन मामले उनके सामने आ रहे हैं. कभी पीड़िता स्वयं तो कभी उनके परिवार वाले मदद की गुहार लगा रहे हैं. दूतावास के मुताबिक़ अब तक लगभग 20 युवतियों को वापस पाकिस्तान भेजा जा चुका है.

बीबीसी ने कई ऐसी लड़कियों से बात की है जो चीनी मर्दों से शादी करके चीन गईं और फिर पाकिस्तान वापस आने में कामयाब रहीं.

मेरी उम्र बीस साल है और मैं गुजरांवाला की हूं. हमारे पड़ोसी के ज़रिए हमारे घर चीनी लड़के का रिश्ता आया था. उन्होंने मेरे घरवालों को चीनी लड़के की तस्वीरें दिखाईं और कहा कि अगर लड़के को आपकी लड़की पसंद आ गई तो उसकी ज़िंदगी बदल जाएगी.

मेरी ज़िंदगी सच में बदल गई. मेरी शादी 24 सितंबर को ली ताओ के साथ की गई. पहले मुझे एक महीने के लिए इस्लामाबाद में रखा गया. वहां मेरे अलावा तीन और लड़कियां थीं.

मेरा वीचैट पर अकाउंट भी बनाया गया लेकिन मेरा पति उसे इस्तेमाल करता था. दस्तावेज़ बनते ही हम चीन चले गए.

हवाई जहाज़, ट्रेन और कार के तीन दिन के सफर के बाद हम शंघाई के पास के शहर जियांगशू पहुंचे. ली ताओ के घर में एक कमरा और लाउंज था. पूरे घर में एक ही वॉशरूम था.

ली ताओ ने मुझे एक महिला से मिलवाया और बताया कि वो उनकी मां हैं. वो हमारे साथ ही रहती थी लेकिन ज़्यादा बात नहीं करती थीं. वो टूटी फूटी अंग्रेज़ी जानता था और मुझे भी टूटी फूटी अंग्रेज़ी आती थी तो बस बहुत कम ही बात हो पाती थी.

शादी के कुछ ही दिन बाद मेरा पति रोज शाम को नशे में धुत्त घर आता और ज़बरदस्ती सेक्स करने की मांग करता. मुझे ऐसा लगता जैसे मैं उसकी ख़रीदी हुई कोई चीज़ हूं जिसको वो जैसे चाहे इस्तेमाल करना चाहता है. मैं उसको मना करती तो वो मुझे मारता पीटता था.

मेरे माता पिता को बताया गया था कि लड़का सीपैक में नौकरी करता है. वहां जाकर पता चला कि वो एक कंप्यूटर इंजीनियर हैं. कहां कंप्यूटर इंजीनियर है ये नहीं पता चल सका.

मैं कुछ ही दिन में चीन में रहने वाली बाक़ी लड़कियों से बात करने लगी. मैं नानजिंग में रहने वाली एक लड़की को पहले से जानती थी. उसने मुझे बताया कि कुछ भी हो, उसके साथ कहीं बाहर मत जाना. उसके पति ने उसे एक डांस बार ले जाकर अपने दोस्तों के साथ छोड़ दिया था. वो बहुत चीख़ी चिल्लाई लेकिन कोई भी उसे बचाने नहीं आया.

मुझे ये बातें सुनकर डर ज़रूर लगा लेकिन अब तक मेरे पति ने मुझे अपने किसी दोस्त से नहीं मिलवाया था. तो मैं ख़ुद को तसल्ली देती रही.

फिर एक दिन ली ताओ मुझे कुछ लोगों से मिलाने बाहर ले गया. वो फ़ैक्ट्री जैसी जगह थी जहां सिर्फ़ मर्द थे. सब मुझे घूर रहे थे.

मैंने उससे पूछा कि हम यहां क्यों आए हैं लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया. मैंने उससे गाड़ी की चाबी छीन कर ख़ुद को गाड़ी में बंद कर लिया. तमाशा तो बना और समय भी बहुत बर्बाद हुआ लेकिन वो मुझे वहां से घर ले आया.

घर आकर उसने मुझे ख़ूब मारा पीटा और मुझसे मेरा फ़ोन छीन लिया. उसने मेरा वीचैट का अकाउंट भी डिलीट कर दिया. मेरा पासपोर्ट, पहचान पत्र, शादी का सर्टीफ़िकेट सब उसके पास था. उस रात मैंने अपनी नस काटने की कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हो सकी. मेरे जिस्म में इतना ख़ून ही नहीं था क्योंकि मैं तीन-तीन दिन तक खाना नहीं खाती थी.

इस घटना के दूसरे दिन मेरा पति मेरे लिए कोर्न और मशरूम का सूप लेकर आया. लेकिन उसके पीने के बाद मैं रात में किसी वक़्त उठी और मेरे सिर में बहुत तेज़ दर्द था. शायद मुझे नींद की गोलियां दी गईं थीं क्योंकि मैं बहुत चीख़ पुकार करती थी.

एक दिन हिम्मत करके मैंने स्थानीय पुलिस को फोन किया. पुलिस ने कहा कि अब चीन आपका घर है जो भी परेशानी है हमें बताएं हम हल करेंगे. मैंने कहा कि मेरे पति ने मेरा फ़ोन और सारे दस्तावेज़ छीन लिए हैं वो मुझे दिला दें. मैंने उनसे कहा कि अगर मेरी मदद नहीं की गई तो मैं आगे शिकायत करूंगी या अपनी जान दे दूंगी. पुलिस ने मेरे पति से कहा कि मेरे सारे दस्तावेज़ लौटा दे.

मैंने दस्तावेज़ मिलने के तुरंत बाद अपने परिजनों को जानकारी दी और उन्होंने चीन में पाकिस्तान के दूतावास से संपर्क किया. फिर मेरे पिता ने पाकितान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी तक को पत्र लिख दिया.

इस पूरे मामले में पांच महीने लग गए और मुझे वापस भेज दिया गया. मैं एक महीना पहले ही अपने घर वापस लौटी हूं. मेरे साथ जो होना था वो हो गया. मैंने अब बताने की हिम्मत इसलिए की क्योंकि अब लड़कियां सामने आ रही हैं और शिकायतें भी दर्ज करा रही हैं. इससे ये होगा कि और लड़कियां वहां नहीं जाएंगी.

मैं लाहौर की रहने वाली हूं. मैं मुसलमान हूं और हमारे घर में मज़हब को बहुत महत्व दिया जाता है. इसलिए जब हमारे इलाक़े के मदरसे के प्रबंधक ने मेरे घर पर रिश्ते के लिए संपर्क किया तो मेरे घर वाले मान गए क्योंकि मदरसे के प्रबंधन ने कहा था कि उन्होंने कई लड़कियों की चीन के नागरिकों से शादी करवाई है और सब बहुत ख़ुश हैं.

मुझे एक महीने तक पाकिस्तान में ही रखा गया था. वहां और भी कई लड़कियां थीं. सभी लड़कियां मेरी तरह ही ग़रीब परिवारों से ही थीं. कुछ मुसलमान जबकि ज़्यादातर ईसाई थीं. सबको अच्छे जीवन की उम्मीद थी.

पाकिस्तान में तो हमें बहुत से सब्ज़बाग़ दिखाए गए, मगर जब एक महीने बाद चीन पहुंचे तो हालात एक दम बदलना शुरू हो गए. मुझे बीजिंग के पास सानचा नाम के एक गांव में ले जाया गया. जिस जगह पर रखा गया वो एक ग़ुफ़ा थी जिसमें एक कमरा था. वहां रसोई या वॉशरूम नहीं था.

जब मैंने शोर मचाया तो मेरे पति ने मेरे मुंह पर ज़ोरदार थप्पड़ मारा और कहा कि हम तुम्हें ख़रीद कर लाए हैं. तुम कोई मांग नहीं कर सकती और ना ही इसका हक़ रखती हो.

यहां मुझे पता चला कि मेरे पति का तो कोई मज़हब ही नहीं है. जब मैं नमाज़ पढ़ने की कोशिश करती तो वो मेरा मज़ाक़ उड़ाता था. मैंने एक बार हिम्मत करके उस से पूछ लिया कि मुसलमान होने का सर्टिफ़िकेट कैसे मिला तो उसने बताया कि पैसे देकर ख़रीदा था.

वहां पहुंचने के तीसरे दिन शराब के नशे में धुत्त लोग आए और मेरे पति ने मुझसे उनके साथ जाने के लिए कहा. मैंने मना किया तो उसने वहीं उनके सामने ही मुझे मारा-पीटा. मैं बेहोश हो गई और फिर पता नहीं कि कितनी देर बाद मुझे होश आया.

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