बेगूसराय में बेटी को इंटर की परीक्षा दिलाने जा रहे पूर्व मुखिया और राजद नेता रामकृपाल महतो को बदमाशों ने बुधवार को गोली मार दी। इसके बावजूद घायल रामकृपाल ने 6 किलोमीटर बाइक चलाकर इंटर की परीक्षार्थी बेटी को जेके स्कूल स्थित सेंटर पर पहुंचाया। बेटी परीक्षा देने सेंटर के अंदर चली गई, इसके बाद वे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे। उन्हें दो गोलियां लगी थीं। उनके परिवार का कहना है कि वे बेटी के करिअर को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने अपनी परवाह नहीं की।
बेटी ने हिम्मत के साथ बदमाशों का सामना किया
पुलिस के मुताबिक, महतो अपनी बेटी दामिनी को बाइक पर परीक्षा दिलाने सेंटर ले जा रहे थे। तभी बदमाशों ने रामकृपाल के सिर पर पिस्तौल तान कर उनकी कनपटी में गोली मारने की कोशिश की। बाइक पर पीछे बैठी बेटी ने हिम्मत के साथ इन बदमाशों का सामना किया और पिस्तौल छीनने की कोशिश की। इससे गोली पिता की कनपटी की बजाय सीने में जाकर लगी। गोली चलने के कारण दामिनी के दोनों हाथ बारूद की वजह से मामूली जख्मी हो गए।
हमला सुबह 8:30 बजे हुआ
आपराधियों ने हमला वीरपुर थाना क्षेत्र के फुलकारी और कारीचक के बीच स्थित लतराही में सुबह करीब साढ़े आठ बजे किया गया। उन्हें दो गोली मारी गईं। उनका इलाज बेगूसराय के एक निजी क्लिनिक में किया जा रहा है। जहां उनकी हालत गंभीर है।
महतो के सीने में बाईं और दाईं तरफ गोलियां लगी हैं। गोली मारने के बाद अपराधी दो बाइक से वीरपुर की ओर भाग गए। अपराधियों की तादाद 6 बताई जा रही है।
दामिनी ने बताया, "हमलावरों ने पापा की कनपटी में पिस्तौल लगा दी थी। वे तो मार ही डालते, मैंने लिपटकर उनकी जान बचाई। मेरा आज इंग्लिश का पेपर था। पापा के साथ मैं बाइक पर पीछे बैठकर जेके हाईस्कूल जा रही थी। 8 से 8.30 के करीब जैसे ही हम लोग लतराही के पास पहुंचे कि वहां घात लगाए पांच-छह बदमाशों ने बाइक को घेर लिया। एक ने कमर से पिस्तौल निकालकर पापा की कनपटी पर सटा दी। मैं बहुत घबरा गई और जोर-जोर से चिल्लाने लगी और पापा को बचाने के लिए उनसे लिपट गई।"
"मैंने पिस्तौल पर हाथ मारा तभी धायं की आवाज हुई। तभी पापा के सीने से खून निकलने लगा। आसपास के कुछ लोग दौड़कर हमारी तरफ आने लगे। इसे देखकर सभी बदमाश वहां से भाग निकले। इस बीच उन्होंने एक ओर गोली चलाई जो फिर पापा को लगी। मेरे दोनों हाथों में जलन होने लगी थी।"
"मैंने देखा गोली के बारूद से मेरी हथेली जल गई थी। तब मैंने पापा से कहा कि पापा अस्पताल चलिए, तो उन्होंने कहा- नहीं मैं ठीक हूं... पहले तुम गाड़ी पर बैठो, मैं तुम्हें परीक्षा सेंटर पर छोड़ दूं। नहीं तो तुम्हारा एक साल बर्बाद हो जाएगा। फिर हम छह किलोमीटर दूर सेंटर पर पहुंचे। मैं वहां से सेंटर के अंदर चली गई। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो पापा के पास काफी लोग जमा हो गए थे। शायद उन्होंने ही पापा को क्लिनिक पहुंचाया।"
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